Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 166, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 166, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 166 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
ख्यातिरख्यातिरित्यत्र वाचोयुक्तिरवास्तवी ।
किं तत्र ख्यापनं नाम स्याद्वाप्यख्यापनं च किम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार परस्परसंकरता होनेपर जो सिद्ध हुआ, उसे कहते हैं।
इसलिए जाग्रत् ओर स्वप्न में कदापि कोई भी भेद नहीं है । दोनों में भी एक का अन्य में अनुप्रवेश
युक्ति से सत्मय नहीं है