Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
त्रिलोकीविलिखल्लेखो विलोलालोकफेनिलः ।
ब्रह्माण्डबुद्बुदोद्भेदः कवाटापीडपीवरः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसमें चित्रलिखित रेखाओं की नाई
तीनों लोक के जनसमूहरूपी रेखाएँ आविर्भूत हो रही हैं तथा सूर्य ओर चन्द्र आदि के प्रकाशो के
कारण वह फेनयुक्त हो गया है| इसमें अनेकों ब्रह्माण्डरूपी बुलबुलों के उद्भेद उपस्थित है तथा
कपाट की नाई मोक्षद्रार को रोक रखनेवाले मोह से यह अभिवृद्ध है