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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

तारकासीकरासारो नभोनन्तनिखातवान् । भावाभावमहावर्तो नानागिरितरङ्गकः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

तारों के समूहरूपी सीकरों की मूसलाधार वृष्टि करनेवाला तथा आकाश के कारण अनन्त सरोवरों से परिपूर्ण यह जगत्‌ अहंकाररूपी महाजल का विलास हे । नाना प्रकार के अनेक पर्वतोंरूपी तरगों से समन्वित इसमें सम्पत्तियां और विपत्तियों के अनेक आवर्त उठते-रहते हैं