Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
भूपीठदृढडिण्डीरपिण्डश्चिद्धनमद्गुमान् ।
चित्राजवं जवीभावमज्जनोन्मज्जनात्मकः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
भूपीठरूपी दृढ़ समुद्रफेन
के पिण्ड से युक्त, अनेक जीवों के कारण जलकाकों से समन्वित तथा उनके नाना प्रकार के
वेगपूर्वक ऊपर, नीचे, तिरछे भ्रमणों के कारण यह मज्जन और उन्मज्जनरूप है