Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
सममेवाशुभं कर्म किमिमाः सकलाः प्रजाः ।
कुर्वन्त्यासां यदा यान्ति दोषाः सर्वादयः समम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वप्न संवित् की सत्यता काकतालीयवत् है ऐसा जो पहले कहा था, उसका उपपादन करते है ।
यह स्वप्नद्रष्टा जीव अन्य उपाय से भी प्राप्त हुए फल को, स्वप्न में सत्यत्व की कल्पना से, यह
फल स्वप्न द्वारा ही सूचित है, ऐसा समझता हे