Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 140, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 140, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 140 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
पुरो मे तिष्ठतां तेषां मत्संरक्षणकर्मणाम् ।
मुहूर्तमात्रं च गतः कालश्चान्ते निवासिनाम् ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रलय-काल की जलराशि में देवता,
दानव, ओर नागो के महलों की दीवारों के हिस्से, स्वर्णमय नौकाओं के समूह की नाई घूम रहे हैं
जिनके मणिनिर्मित झरहरे झरोखों की शोभाएँ विद्याधरों की रमणियों की भुजलताओं से परिवेष्टित
चन्द्रकान्त मणियों में मंजिल विभाग जैसी मालूम पड़ रही हैं