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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

येनायताभिमतदर्शनद्रष्टृदृश्यमुक्तस्वभावमवभासनमात्मतत्त्वम् । सर्वार्थशून्यमत एव च शून्यरूपमेकं खमात्रमिव मात्रविकल्पमेव ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

चूँकि सर्वसाक्षिब्रह्म का रूप परमार्थतः समस्त विकल्पों से रहित ही है, इसीलिए अहंकार के वश से विस्तृत हुए मानस विकल्पों तथा द्रष्टा, दर्शन, दृश्यह्इस त्रिपुटीरूप इन्द्रिय के विकल्पों से मुक्तस्वभाव (जाग्रदावस्था से शून्य) होने के कारण वासनामय स्वाप्निक पदार्थो से रहित है । शून्यरूप एकमात्र आकाश की तरह पूर्ण अवभासवाला एक चिद्रूप आत्मतत्त्व ही परिशिष्ट है