Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
गगनमवनितः समेत्य वह्नेर्वरविभवेन जगत्यनन्तकोशम् ।
क्वचिदहमभितो दिदृक्षुरग्रे सृत उरगाशनवद्वलादविद्याम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
ज्योतिश्चक्र सहित (नक्षत्रमण्डल सहित) पृथ्वी को चारों ओर से घेरकर द्युलोक इसी भूलोक
में स्थित है। आकाश उसके सब ओर ऊपर को ही है और पृथ्वी तल सबके नीचे की ओर है