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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

पवनवहनसंनिवेशनानासुहयपयोधरदेहकैरनेकैः । गजहरिणमृगेन्द्रवृक्षवल्लीमृगनगपन्नगपक्षिभिः परीतम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

अन्तरिक्ष लोक में बहनेवाली मन्दाकिनी आदि नदियाँ सौरपरिवाररूपी चन्द्र, सूर्य आदि युक्त नक्षत्रमण्डल का और उस भूगोल का दूर से वायु बन्धनवश अवलम्बन कर, उनका स्पर्श किये बिना ही सदा खूब भ्रमण करती हैं