Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
कुन्दस्त्रैलोक्यराजोऽभूज्जनयित्वा सुतं निजम् ।
कालेन जीवितस्यान्ते जगाम परमं पदम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
उसका पुत्र कुन्द तीनों लोक का राजा हुआ ओर पुत्र उत्पन्न करके समय से जीवन का अन्त आने
पर वह भी परम पद को प्राप्त हो गया