Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
ततो जीवितपर्यन्ते त्यक्त्वा देहमनिन्दितः ।
निर्वाणमाययौ शक्रो निःस्नेह इव दीपकः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्पश्चात् अनिन्दित वह इन्द्र जीवन के अन्त में इस
पांचभौतिक शरीर का त्याग कर, तैलरहित दीपक की नाई, निर्वाण (मोक्ष) को प्राप्त हो गया