Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 126, Verse 74
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 126, verse 74 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 74
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
हे आकाश के कोष
के सदृश निर्मल आशयवाले श्रीरामचन्द्रजी, जो सम्पूर्ण दुश्यसमूह शिलाघनरूप शान्त मौनरूप स्थित
है, उसका आत्मा ही जगत् यह नाम धारण कर मोहित-सा स्थित है, अहो माया आश्चर्यभूत है