Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
एकोऽभिलाष उत्पन्नो भोगेभ्यश्च निवार्यते ।
तत्क्षये यात्यविद्यायाश्चतुर्थांशः स्वयत्नतः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
संसारबन्धन से मुक्त होने की कहीं एक
उत्कट इच्छा उत्पन्न हो गई, तो उस मुमुक्षु पुरुष को वैराग्य आदिसम्पत्ति ही भोगों तथा उनके
साधनों से दूर हटा देती है और भोगों के नष्ट होने से अविद्या का चतुर्थ अंश अपने यत्न से
ही नष्ट हो जाता है