Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
अर्धं सज्जनसंपर्कादविद्याया विनश्यति ।
चतुर्भागस्तु शास्त्रार्थैश्चतुर्भागं स्वयत्नतः ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, अविद्या का आधा
भाग तो सिर्फ सज्जन पुरुषों के सम्पर्क से ही नष्ट हो जाता है | बाकी बचे दो चतुर्थ भागों
में से एक भाग को बुद्धिमान् पुरुष को शास्त्रार्थो के पर्यालोचन से तथा दूसरे को अपने आत्म-
साक्षात्काररूप यत्न से नष्ट कर देना चाहिए