Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
साधुसङ्गमशास्त्रार्थस्वयत्नैः क्षीयते मलम् ।
एकैकेनाथ सर्वैश्च तुल्यकालं क्रमादपि ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
सज्जनो की संगति, शास्त्रों की चर्चा और अपने प्रयत्न-इन सबकी
एक साथ प्राप्ति होने पर समकाल में यानी एक ही कालमें तथा एक-एक की प्राप्ति होने पर
क्रमशः अविद्यारूपी मल क्षीण हो जाता है