Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
संपन्ने संगमे साधोरविद्यार्धं क्षयं गतम् ।
विद्धि वेद्यविदां श्रेष्ठ ज्येष्ठश्रेष्ठदशोदयात् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
तो अन्य सब भूमिकाओं में ज्येष्ठ तथा साधनचतुष्टय सम्पत्ति से श्रेष्ठ शुभेच्छानामक प्रथम
भूमिका प्रतिष्ठा के उदय से ही क्षय को प्राप्त हो गया