Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
मा भूत्कस्यचिदेवैषा राजन्व्यसनिता भृशम् ।
पश्यैतां बिम्बितां हंसो हंसीमनुसरन्मृतः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
दसरा अनुचर पर्वतो का वर्णन करता है /
पर्वतरूपी हाथियों के वृक्षरूपी खड़े हुए रोंगटों मे पुष्पराशि शिखरो मेँ बसन्त ऋतु के हिमकण
के सदुश आकाश से च्युत तारों की लीला से शोभित हो रही है