Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 69
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, verse 69 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 69
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
यदि कई शका करे कि चेतन को बुद्धिपर्वक किये यये काम में प्रयोजन की अपेक्षा होती है
अदुद्धियूर्वक किये यये काम में तो प्रयोजन की अपेक्षा नहीं है, तो इस पर कहते हैं /
हे श्रीरामचन्द्रजी, उक्त जगत्सृष्टिरूप कार्य (~) किसीका अबुद्धिपूर्वक तो नहीं हो सकता
और बुद्धिपूर्वक तो उस व्यर्थ कर्म को कौन पागल करेगा ?