Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
अच्छेद्योऽसावदाह्योऽसावक्लेद्योऽशोष्य एव च ।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽसौ सनातनः ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
यह चेतन पुरुष किसी से छेदा नहीं जा सकता, कोई इसे जला नहीं
सकता, कोई इसे जल से भिगा नहीं सकता और कोई इसे सूखा भी नहीं सकता है,यह तो नित्य,
सर्वगत, स्थाणु, अचल तथा सनातन है (५)