Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
पुरुषो न शरीरादि न च चित्तादि किंचन ।
पुरुषश्चेतनं नाम न स नश्यति कर्हिचित् ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन््रजी के प्रश्नवाक्य में कद्ध पुरुषोत्तमः” इस पद को सुनकर उसके अर्थ की
जिज्ञासा की संभावना करते हुए श्रीवश्तिष्ठजी पुरुषवर्णनपूर्वक उसमे उत्तमता दिख्लाते है /
पुरुष शरीर आदि और चित्त आदि कुछ नहीं है, किन्तु वह एकमात्र चेतन ही है । वह कभी भी
नष्ट नहीं होता (४)