Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
अहंतावासनाद्वैतं वस्तुता दृश्यवस्तुषु ।
यस्यास्त्यसौ साधयति खगमादिक्रियाफलम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
सिद्धिरूप दृश्य वस्तुओं में “म भोक्ता होऊँ” इस प्रकार अहन्ता वासनादिरूप परिच्छिन्न
आत्मकल्पना जिसके भीतर विद्यमान है, वह आकाशगमन आदि क्रिया फल को सिद्ध कर लेता
है