Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 100, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 100, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियाद्रव्यवेदशास्त्रैषणाभ्रमैः ।
अबोधता तु या संवित्कदाचित्सा न नश्यति ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए पुण्य
तीर्थ, पुण्य पर्व आदि देश काल में स्नान, दान आदि कर्मों से, रसायन, मन्त्र, औषधि आदि द्रव्यों
से, कर्मशास्त्र द्वारा उपदिष्ट लोकैषणा, धनैषणा ओर पुत्रैषणा रूप भ्रान्तियों से वह अबोधता ओर
उससे उत्पन्न विक्षेपसंवित् कभी भी नष्ट नहीं होती