Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 91, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 91, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
यत्खातवलयस्तेन वैरिणा हस्तिनः कृतः ।
तत्तपोदुःखमखिलमज्ञानेन तवार्पितम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
"स खातवलयं वक्रे“ (उस महावत ने गोल गड्ढे का निर्माण किया) इस उक्ति का तात्पर्य कहते हैं ।
हे राजन्, हाथी के शत्रु उस महावत ने जो गोल गड्ढे का निर्माण किया था, वह आपके अज्ञान ने
तपरूपी सम्पूर्ण दुःखों का एक गोल गड्ढा अर्पित किया है