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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अत्र ते ये त्रयः प्रोक्ता गुणास्तेऽपि त्रिधा स्मृताः । सत्त्वं रजस्तम इति प्रत्येकं भिद्यते गुणः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

कार्य अविद्या ओर कारण अविद्या इन दोनों अविद्याओं मेँ अनुगत एक-एक गुण के अवान्तर तीन-तीन भेद बतलाते हैं। इस प्रकृतिरूपी अविद्या में जो तीन गुण बतलाये गये हैं, वे भी तीन प्रकार के हैं यानी सत्त्व, रज तम इनमें से प्रत्येक गुणका तीन-तीन प्रकार से भेद होता है