Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अविद्यां प्रकृतिं विद्धि गुणत्रितयधर्मिणीम् ।
एषैव संसृतिर्जन्तोरस्याः पारं परं पदम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रश्नोत्तयो की अनुरूपता के लिए प्रकृति की अविद्यारूपता बतलाते हैं।
हे श्रीरामजी, सत्त्व आदि तीन गुणस्वरूप धर्मो से युक्त प्रकृति ही अविद्या है, यही प्राणियों का
संसार है, इससे (प्रकृति से) पार पा जाना ही परमपद यानी मोक्ष कहलाता है