Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
नवधैवं विभक्तेयमविद्या गुणभेदतः ।
यावत्किंचिदिदं दृश्यमनयैव तदाश्रितम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, इस प्रकार यह अविद्या गुणभेदों से नव प्रकार से विभक्त हो जाती है यानी सूक्ष्म, मध्य ओर
स्थूल अविद्या का प्रत्येकशः तीन-तीन भेद होकर नव तरह की हो जाती है, जो भी कुछ यह दृश्य प्रपंच
दिखाई पड़ता है, वह सब इसी अविद्या में आश्रित है