Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 84

तिरासीवाँ सर्ग समाप्त चौरासीवाँ सर्ग॑ शिखिध्वज का वैराग्य, चूडाला का आश्वासन, रात में राजा शिखिध्वज का सोई हुई अपनी प्रिया को छोड कर चुपचाप जंगल में भाग जाना और मन्दराचल में स्थिति - इन सबका वर्णन ।

5 verse-groups

  1. Verses 1–14महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, उसके बाद राजा शिखिध्वज तत्त्वज्ञानरूप विश्रान्तिस्…
  2. Verses 15–21अब वनराजि का चूडाला की उपमा से वर्णन करते हैं। (हे वरानने, अब हमें तुम्हारे सदृश वनपंक्ति…
  3. Verses 22–27पति को वैराग्य दृढ़ हुआ है या नहीं, इसकी परीक्षा कर रही चूडाला पहले की कामासक्त का ही, अव…
  4. Verses 28–30इस तरह विचलित किये जानेपर भी अविचलित वैराग्य से सम्पन्न राजा शिखिध्वज अपनी प्रियभार्या चू…
  5. Verses 31–62यह जो तुमने कहा है कि समय प्राप्त हुए बिना प्रजापालन का त्याग करनेवाले राजाओं को राज्यविन…