Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 93
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 93 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 93
संस्कृत श्लोक
अर्कः पीत्वा निशानाथमामावास्यं पुनःपुनः ।
उद्गिरत्यमले पक्षे मृणालमिव सारसः ॥ ९३ ॥
हिन्दी अर्थ
सूर्यात्मक तेज अमावास्या तक
(&) इसमें "यदा वा अग्निरुद्धायति वायुमेवाप्येति" यह श्रुति प्रमाण है ।
चन्द्रमा को बारबार यानी बिलकुल पीकर शुक्ल पक्ष में उस तरह उगल देता है, जिस तरह सारस
कमलदण्ड को