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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 92

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 92 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 92

संस्कृत श्लोक

सप्ताम्बुधिपयः पीत्वा धूमोद्गारेण वाडवः । पयोदतां प्रयातेन तदेव जनयत्यलम् ॥ ९२ ॥

हिन्दी अर्थ

सद्रूप परिणाम से अग्नि और चन्द्र - ये दोनों परस्पर एक दूसरे के कारण हैं, इनका एक-एक जगह उदाहरण देते हैं। बडवानल सातों समुद्र का जल पीकर धूम्र के उद्गार द्वारा मेघ बन करके उसी मेघरूप से फिर सातो समुद्र मे जलात्मक चन्द्र को ही उत्पन्न करता है