Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 79
अठहत्तरवाँ सर्ग समाप्त उननासीवाँ सर्ग अपूर्वशोभासम्पन्न देखकर राजा शिखिध्वज से पूछी गईं चूडाला द्वारा अपनी शोभा में हेतु आत्मज्ञान का वर्णन ।
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- Verses 1–5इस प्रकार विचार से उत्पन्न तत्त्वज्ञान की - अभ्यास द्वारा उत्तरोत्तर भूमिकाओं में - प्रति…
- Verses 6–20आविर्भाव से वह नवीन उत्पन्न सुन्दर पुष्पलता के सदुश शोभने लगी । अनन्तर किसी एक समय उस पूत…
- Verses 21–22इस प्रकार राजा द्वारा पूछी गयी चूडाला परिच्छिन्न देहात्मतात्याग और पूर्ण अद्वितीय ब्रह्मा…
- Verses 23–31“न किंचित् किंचिदाकारं” इस अपनी उक्ति का प्रकारान्तर से वर्णन करती है । सृष्टि का अतिक्र…