Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 77
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- Verses 1–6मनरूप पक्षी का हृदय में निरोधकर, अविचल शिखिध्वज की नाई, आप शान्तिपूर्वक अपने स्वरूप में स…
- Verses 7–26इसी अर्थ का स्पष्टीकरण करते है । क्योकि देखिये - एक ही आम के वृक्ष में पहले अनेक फल उत्पन…
- Verses 27–52मेरे सदश उस बाला को भी स्वाभिलाषाजनित सन्ताप कब होगा, जिससे कि हम दोनों का संघटन शीघ्र हो…