Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 71, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 71, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्तवति वेताले वक्तुं प्रश्नान्विहस्य सः ।
उवाच वचनं राजा दन्तांशुधवलाम्बरः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे रामभद्र, जव ऐसा कहकर वेताल चुप हो गया तव हँसकर ({)) वह
राजा, जिसके वस्त्र ओर आकाश दतां की किरणों से धवल हो गये थे, वचन बोला
सर्ग सन्दर्भ
सत्तरवाँ सर्ग समाप्त च इकहत्तरवों सर्ग अनन्तकोटि ब्रह्माण्डरूप फल और वृक्ष आदि की कल्पनाओं से सविस्तर प्रथम प्रश्न का समाधान |