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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 71

सत्तरवाँ सर्ग समाप्त च इकहत्तरवों सर्ग अनन्तकोटि ब्रह्माण्डरूप फल और वृक्ष आदि की कल्पनाओं से सविस्तर प्रथम प्रश्न का समाधान |

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  1. Verse 1महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे रामभद्र, जव ऐसा कहकर वेताल चुप हो गया तव हँसकर ({)) वह राजा,…
  2. Verse 2"कस्य सूर्यरश्मीनाम्‌* इत्यादि प्रथम प्रश्न का उत्तर देने के लिए पहले वेताल का पाण्डित्या…
  3. Verses 3–21पदार्थो में सत्तास्फूर्ति व्यवहार का प्रवर्तक मायाशबल ब्रह्म-इन चौवह पदार्थों का यहाँ पर…