Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
स्वप्नानां भिक्षुणा दृष्टं शतं शतशरीरकम् ।
सर्वमुद्देशतो ज्ञातं तत उक्तं न तन्मया ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
इसमें प्रथम विकल्प का अवलम्बन कर महाराज वसिष्ठजी उत्तर देते हैं।
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : भद्र, भिक्षु ने शतशरीररूप सौ स्वप्न देखे थे, उन्हें आपने मेरे द्वारा
पहले कहे गये तत्-तत् जन्मादि के प्रस्ताव से जान ही लिया था; इसीलिए मने नामतः विशेषरूप
से नहीं कहा