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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 67, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 67, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

तस्य भिक्षोस्तु जीवोऽसौ भूत्वा पद्मजसारसः । जीवन्मुक्तः स्थितो भूयो नासौ संसृतिभाजनम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

तब वह आपके सत्यसंकल्प के प्रभाव से जी जाय ? महाराज, उस भिक्षु का तो जीव अब ब्रह्मदेव का सारस बनकर जीवन्मुक्त होकर अवस्थित हो गया, अतः फिर वह संसार का भागी नहीं हो सकता । निचोड़ यह है कि यदि उस शरीर के द्वारा भोगोपयोगी प्रारब्ध बच जाता तो मेरा सत्यसंकल्प काम कर जाता, परन्तु वह है नहीं