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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 67, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 67, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । राजंस्तस्य महाभिक्षोः स देहः प्राणवर्जितः । क्लेदो वैवर्ण्यमायातो नासौ जीवितभाजनम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके लिए आज का ही दिन विदेहमुक्त के लिए निश्चित है, यह जो मेने पहले कहा था, उसे भूलकर आप यह कह रहे हैं, यह भावभंगी से सूचना कर रहे महाराज वसिष्ठजी कहते है । महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे राजन्‌, उस भाग्यवान्‌ भिक्षु की वह देह प्राणरहित हो गयी है, प्राणों को पकड़कर शरीर में रखनेवाला अन्नरस उसका सूख गया है, अत: अब वह किसी तरह जीवनशक्ति का भाजन नहीं रह गया