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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 64

10 verse-groups

  1. Verses 1–13हैँ । श्रीरामभद्र ने कहा : भगवन्‌, वे जीवट ब्राह्मण आदि, जो एक भिक्षु के संकल्परूप ही थे,…
  2. Verse 14समस्त स्वप्नसंकल्यादि के एक साथ अवलोकन मे कौन-सा उपाय है 2॥ हे प्रिय, जिस उपाय से संकल्प,…
  3. Verse 15उत्तम अभ्यास के बिना भी अपने-आप ही योगसिद्धि का फल प्राप्त है यो विशेष बतलाते है। हरि, हर…
  4. Verses 16–21संकल्पित अर्थ की प्राप्ति मे अभ्यास ओर योग का जो उपयोग है वह चित्त की एकाग्रता के सम्पादन…
  5. Verse 22तव वे रुद्र की सन्निधि में एक-दूसरे का साक्षात्कार कैसे कर पाये इस पर कहते हैँ । भद्र, एक…
  6. Verse 23उन सवो के अपने-अपने संसारद्शन में तो उनकी इच्छा ही कारण है। यहाँ मैं यह विद्याधर हो जाऊँ,…
  7. Verses 24–27रामभद्र, इस रीति से किसी एक वस्तु की तदाकार भावना सफल हो जाती है (यह आपसे मैंने कहा) । दू…
  8. Verses 28–33के लिए हजार रूप के होते हुए भी फिर एक रूप धारण कर लेते हैं । भगवान्‌ जनार्दन अपने अंशरूप…
  9. Verses 34–35इसी रीति से प्रकृत मे भी जान लेना चाहिए। इस रीति से भिक्षु के संकल्पस्वरूप जीवट, ब्राह्मण…
  10. Verse 36उस समय उनका भी अपने घर में और सव भुवनो मे अनेक देहों की कल्पना से इच्छानुसार विहार एक साथ…