Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 64, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 64, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
चित्तथा तदवाप्नोति सर्वात्मत्वादविक्षतम् ।
संकल्पः स्वप्नकस्त्वङ्ग यया च दशयाप्यते ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त स्वप्नसंकल्यादि के एक साथ अवलोकन मे कौन-सा उपाय है 2॥
हे प्रिय, जिस उपाय से संकल्प, स्वप्न आदि एक साथ दिखाई पडते हैं उस उपाय को आप
सुनिये । अभ्यास और योग के बिना उनका एक साथ अवलोकन मिल नहीं सकता