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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, Verse 59

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

शतरुद्रशतानीह सन्ति राम महान्ति हि । एतदेकादशं विद्धि संसारं प्रतिसंस्थितम् ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

"सहस्राणि सहग्रंशो ये रुद्रा अधि भूम्याम्‌" इत्यादि श्रुतियों में प्रसिद्ध रुद्रों की इसी प्रकार की स्थिति है, यह कहते हैं। श्रीरामजी, आज तक यहाँ बहुत से बड़े-बड़े सौ शतरुद्रवाले संसार हो गये हैं। भिक्षु-रुद्र से कल्पित सौ जगत्‌ के बीच में यह आप और मेरे द्वारा अनुभूयमान सामने स्थित जगत्‌ ग्यारहवाँ भ्रामर रुद्र का संसार है, यह आप जानिये