Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
तदर्थं यत्कृतं किंचित्तद्व्योम लकुटैर्हतम् ।
तस्मिन्यदधमे दत्तं तत्त्यक्तं किं न कर्दमे ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, इस अधम मूर्ख को जो दिया गया है, वह क्या कीचड़ में फेंका गया नहीं समझना
चाहिए ? ओर उसके साथ की गई जो कथा है, वह क्या आकाश में कुत्ते का आह्वान (भकना)
नहीं है ?