Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
तस्मिन्विश्रमणं यत्तच्छिलाफलहके यथा ।
तेन यत्संगमः स स्यात्स्थाणुना भुवि जङ्गले ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
मूर्ख के साथ की जानेवाली संगति उस प्रकार की होगी, जिस प्रकार अरण्यभूमि में स्थाणु के (छिन्न
वृक्षमूल के) साथ की जानेवाली संगति होती हे ओर उसके लिए जो कुछ उपकृत होगा, वह भी आकाश
को दण्डे से मारने के तुल्य ही होगा