Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
इदं चाहमिदं चाहमिति यत्प्रवदाम्यहम् ।
तदेतदात्मतत्त्वं तु तुभ्यं ह्युपदिशाम्यहम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं दिशास्वरूप हूँ” मेँ जगद्रूप हूँ" इत्यादि विभूतियों के उपदेश का भी उन -उन पदार्थों के
अधिष्ठानभूत स्व-स्वरूप के संशोधन में ही तात्पर्य है, यह कहते हैं।
पार्थ, 'यह मैं हूँ” और “यह भी मैं हूँ” इत्यादि जो कुछ मैं कहता हूँ, वह सब इस अपरोक्ष आत्मतत्त्व
का ही मैं तुम्हें उपदेश देता हू