Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
इदं च ते पाण्डुसुत स्वकर्म क्षात्रमुत्तमम् ।
अपि क्रूरमतिश्रेयः सुखायैवोदयाय च ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पाण्डुपुत्र, तुम्हारा यह उत्तम क्षात्र कर्म यानी क्षत्रियो के लिए शास्त्रविहित युद्ध
में पीठ न दिखाना आदि अपना कर्म हे । वह बन्धुवधरूप होने से क्रूर होता हुआ भी चित्तशुद्धि द्वारा
ब्रह्मज्ञानादिरूप सुख का साधन तथा धर्म, यश, राज्य, स्वर्ग आदि अभ्युदय का साधन होने से
अतिकल्याणरूप ही हे