Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
निर्ममो निरहंकारः समदुःखसुखः क्षमी ।
यः स कार्यमकार्यं वा कुर्वन्नपि न लिप्यते ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
जो ममतारहित, अहंकार से शून्य, सुख और दुःख होने पर हर्ष-विषाद से रहित तथा क्षमावान्,
है वह अवश्यकर्तव्य (शास्त्रीय कर्म) अथवा अनवश्यकर्तव्य (लौकिक कर्म) कर रहा भी उनसे लिप्त
नहीं होता