Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
दृश्यते विमले तस्मिन्नयं संसारविभ्रमः ।
कटकादि यथा हेम्नि तरङ्गादि यथाम्भसि ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सुवर्णं
में कटक आदि तथा जल में तरंग आदि दिखाई पडते हैं, वैसे ही निर्मल सन्मात्रस्वरूप परमात्मा में यह
संसार-विभ्रम (जगद्विलास) दिखाई पडता है