Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
क्षीरादेरिव तेनास्ति ब्रह्मणो न विकारिता ।
अनाद्यन्तविभागस्य न चैषोऽवयविक्रमः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे दूध
आदि के समान ब्रह्म में विकारिता नहीं है। (जैसे परमाणुओं से द्रवणुक आदि अवयवियों का आरम्भ
होता है, वैसे ही यहाँ पर भी मान लिया जाय तो इस पर कहते हैं।) आदि और अंत के विभाग से रहित
ब्रह्म मेँ यह अवयवी का आरम्भ-क्रम भी नहीं हो सकता । आदि एवं अंत रूप देशकृत परिच्छेद तथा
क्रिया, संयोग, विभाग आदि से युक्त अवयवों में ही अवयवियों का आरम्भ-क्रम (07) होता है, न कि
उनसे विलक्षण ब्रह्म में यह भाव है