Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
पयस्तां पुनरभ्येति दधित्वान्न पुनः पयः ।
बुद्धमाद्यन्तमध्येषु ब्रह्म ब्रह्मैव निर्मलम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
दही बन जाने से दूध पुनः अपनी पयोरूपता में (दूधरूप पूर्वावस्थामें)
नहीं आता । परह्य में तो जगद्रूप कार्य विधर्मी होने से विकारादि शब्दवाच्य नहीं हैं, यह कहते हैं ।
आदि, मध्य और अंत किसी भी दशा में ब्रह्म तो निर्विकार ब्रह्मरूप ही अवगत होता है