Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
रूपसत्ता जलसत्ता स्वादुसत्ता तथैव च ।
तथैव रससत्ता च गन्धसत्ता तथैव च ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर वायु की सत्ता
तथा उसका प्रकाश करनेवाली स्पन्दसत्ता; स्पर्श की सत्ता और उसका प्रकाश करनेवाली त्वगिन्द्रिय
की सत्ता एवं सम्पूर्ण तेजों की सत्ता और तेजःसत्ताओं का प्रकाश करनेवाली यानी प्रत्यक्ष ज्ञान
करानेवाली चक्षुरिन्द्रिय की सत्तारूप हो जाती है ॥३ ८॥ एवं रूपसत्ता, जलसत्ता और वैसी ही स्वाद
की सत्ता एवं स्वाद बतलानेवाली रसनेन्द्रिय की सत्ता और उसी प्रकार गन्ध की सत्ता बन जाती
है