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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 69

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, verse 69 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 69

संस्कृत श्लोक

स एव हि पुमान्कोपाद्यथेहान्य इव क्षणात् । भवत्येवं विकल्पाङ्का चित्स्वरूपान्यतां गता ॥ ६९ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार इस संसार में वही (सुशील ही) पुरुष क्रोधवशं क्षणभर में राक्षस-सा क्रूर हो जाता है, वैसे ही यह चिति भी संकल्प-विकल्पात्मक चिहनो से युक्त होकर दूसरे स्वरूपवाली हो जाती है