Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अपि चित्रनराद्देहनरस्तुच्छतरः स्मृतः ।
आधिव्याधिपरिम्लाने स्वयं क्लेदिनि नाशिनि ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, आधि ओर व्याधि से निरन्तर दुःखित, अश्रु आदि से अर्द्र तथा
स्वयं विनाशशील इस शरीर में उस प्रकार की स्थिरता नहीं रहती, जिस प्रकार की चित्रलिखित पुरूष
में स्थिरता रहती हे । यह बात सर्वविदित हे